What is defense mechanism?

 Defense Mechanisms (रक्षा तंत्र)

Defense mechanisms ऐसे मनोवैज्ञानिक तरीके होते हैं, जिनका उपयोग हमारा mind stress, anxiety या uncomfortable feelings से खुद को बचाने के लिए करता है। ये प्रक्रियाएँ अक्सर बिना हमारी awareness के काम करती हैं, यानी हमें पता भी नहीं चलता कि हम खुद को protect करने के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।

Sigmund Freud ने इस concept की नींव रखी, जिसे आगे उनकी बेटी Anna Freud ने विस्तार से समझाया। यह concept Psychoanalysis का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जब हमारे अंदर कोई conflict, guilt या fear पैदा होता है, तो हमारा mind उसे सीधे face करने के बजाय defense mechanisms का सहारा लेता है, ताकि हमें emotional pain कम महसूस हो।

Common Types of Defense Mechanisms

Repression (दमन):

इसमें हम uncomfortable thoughts या memories को unconscious mind में दबा देते हैं, ताकि वे हमें परेशान न करें।

Denial (इनकार):

इसमें व्यक्ति किसी सच्चाई को स्वीकार करने से मना कर देता है, क्योंकि वह उसे emotionally disturb कर सकती है।

Projection (आरोपण):

इसमें हम अपनी feelings या thoughts को किसी दूसरे पर डाल देते हैं।

Displacement (स्थानांतरण):

इसमें हम अपनी emotions को असली target की बजाय किसी और पर निकालते हैं।

Rationalization (तर्कसंगत बनाना):

इसमें हम अपने गलत या uncomfortable behavior के लिए logical explanation ढूंढ लेते हैं, ताकि हमें guilt महसूस न हो।

Regression (पिछले व्यवहार पर लौटना):

Stress के समय व्यक्ति पुराने, बचकाने behavior में वापस चला जाता है।

Importance (महत्व)

Defense mechanisms हमें emotional balance बनाए रखने में मदद करते हैं। ये हमें तुरंत stress से बचाते हैं, लेकिन अगर इनका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो, तो यह reality से दूर ले जा सकते हैं।

यह concept Id, Ego and Superego से भी जुड़ा है, क्योंकि Ego इन defense mechanisms का उपयोग करके Id और Superego के बीच balance बनाने की कोशिश करता है।